:
Breaking News

Bihar Education News: शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की बदलेगी ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था, 5 साल बाद तबादले का प्रस्ताव

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था बदलने की तैयारी है।

पटना, 27 सितंबर, आलम की खबर: बिहार के शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों की पोस्टिंग व्यवस्था में बदलाव की तैयारी चल रही है। विभाग कर्मचारियों के कैडर और ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों की तैनाती का दायरा मौजूदा व्यवस्था की तुलना में व्यापक हो सकता है।

प्रस्तावित व्यवस्था में संबंधित संवर्ग के कर्मचारियों को केवल उनके मौजूदा जिला या प्रमंडल तक सीमित रखने के बजाय आवश्यकता के अनुसार राज्य के दूसरे जिलों में भी तैनात किए जाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि यह बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम निर्णय के बाद ही इसकी वास्तविक रूपरेखा स्पष्ट होगी।

करीब पांच साल बाद तबादले पर विचार

विभागीय स्तर पर तैयार किए जा रहे प्रस्ताव में एक स्थान पर लंबे समय तक तैनाती को सीमित करने के लिए निश्चित अवधि का प्रावधान शामिल किए जाने पर विचार हो रहा है। इसमें करीब पांच वर्ष की अवधि को आधार बनाए जाने की चर्चा है।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो किसी कर्मचारी के एक कार्यालय या स्थान पर पांच वर्ष पूरे होने के बाद प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उसका तबादला दूसरे जिले में किया जा सकता है। इससे लंबे समय से एक ही कार्यालय में काम कर रहे कर्मचारियों की तैनाती बदलने की प्रक्रिया को नियमित करने का प्रयास होगा।

हालांकि पांच वर्ष की अवधि अंतिम निर्णय नहीं है। नियमों को अंतिम रूप देने और सक्षम स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही यह तय होगा कि तबादले की अवधि क्या होगी और किन परिस्थितियों में कर्मचारियों को स्थानांतरित किया जाएगा।

जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों का होगा पुनर्विन्यास

प्रस्तावित व्यवस्था में रैशनलाइजेशन यानी कर्मचारियों के पुनर्विन्यास को भी शामिल किए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य कार्यालयों में उपलब्ध कर्मचारियों और काम के बोझ के बीच संतुलन बनाना है।

जिन कार्यालयों में स्वीकृत पदों और कार्यभार की तुलना में कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां से जरूरत के मुताबिक कर्मियों को ऐसे कार्यालयों में भेजा जा सकता है जहां काम अधिक है और कर्मचारियों की उपलब्धता कम है।

इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की तैनाती केवल पुराने कैडर क्षेत्र को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि कार्यालय की वास्तविक जरूरत के आधार पर करने की कोशिश की जा सकती है।

कैडर का दायरा बढ़ने से तबादले के विकल्प बढ़ेंगे

सरकारी विभागों में अलग-अलग संवर्ग के कर्मचारियों का कैडर अलग स्तर का होता है। कुछ संवर्ग राज्य स्तर के होते हैं, जबकि कुछ का दायरा जिला या प्रमंडल तक सीमित रहता है।

कैडर का क्षेत्र सीमित होने पर कर्मचारी का तबादला भी सामान्य तौर पर उसी दायरे में होता है। शिक्षा विभाग के अधीन कार्यालयों में कार्यरत लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों के मामले में भी लंबे समय से ऐसी व्यवस्था रही है।

अब विभाग कैडर व्यवस्था में संभावित बदलाव के जरिए कर्मचारियों की तैनाती का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार राज्य के अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

एक ही कार्यालय में लंबे समय तक तैनाती पर बदल सकता है नियम

शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कई मामलों में अधिकारी बदलते रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारी लंबे समय तक उसी कार्यालय में काम करते रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को स्थानीय कामकाज, कार्यालय की पुरानी फाइलों और प्रक्रियाओं की जानकारी अधिक होने के कारण नए अधिकारियों को भी उनके अनुभव पर निर्भर रहना पड़ता है।

प्रस्तावित बदलाव का एक उद्देश्य ऐसी स्थिति को कम करना भी बताया जा रहा है। कर्मचारियों के समय-समय पर स्थानांतरण से अलग-अलग कार्यालयों में काम करने का अनुभव बढ़ सकता है और किसी एक कार्यालय में लंबे समय तक एक ही कर्मचारी पर निर्भरता कम की जा सकती है।

शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था के बाद कर्मचारियों पर नजर

शिक्षा विभाग में शिक्षकों की तैनाती को जरूरत और उपलब्धता से जोड़ने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया आधारित स्थानांतरण व्यवस्था लागू की गई है। अब विभागीय कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की पोस्टिंग व्यवस्था में भी इसी तरह अधिक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के स्तर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था को अधिक व्यापक और जरूरत आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कर्मचारियों के कैडर, तैनाती की अवधि और कार्यालयों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए नए नियम तैयार करने की कवायद चल रही है।

अंतिम मंजूरी के बाद साफ होगा नया स्वरूप

फिलहाल कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित ट्रांसफर-पोस्टिंग नियम अंतिम रूप में लागू नहीं हुए हैं। पांच वर्ष की अवधि, राज्य के किसी भी जिले में पोस्टिंग और रैशनलाइजेशन जैसे प्रावधानों पर अंतिम निर्णय सक्षम स्तर से मंजूरी के बाद ही होगा।

यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो शिक्षा विभाग के जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में कर्मचारियों की तैनाती का मौजूदा ढांचा बदल सकता है। लंबे समय से एक ही जगह तैनात कर्मचारियों के तबादले का रास्ता खुल सकता है और जिन कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी है, वहां उपलब्धता के अनुसार कर्मियों का पुनर्विन्यास किया जा सकता है।

अब निगाह इस बात पर है कि विभाग प्रस्ताव को किस स्वरूप में अंतिम रूप देता है और नई ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था कब से लागू की जाती है।

यह भी पढ़ें

बिहार में बारिश के बाद बदला मौसम, कई जिलों में धूप के साथ बढ़ेगी गर्मी और उमस

तबादला व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ जरूरत का संतुलन जरूरी

किसी भी बड़े विभाग में कर्मचारियों की तैनाती का असर कार्यालय के कामकाज पर पड़ता है। यदि कहीं कर्मचारियों की संख्या जरूरत से अधिक और कहीं कम है तो पुनर्विन्यास से कार्यभार का संतुलन बनाया जा सकता है। साथ ही तबादले के नियम स्पष्ट, समान और पारदर्शी हों तो कर्मचारियों को भी व्यवस्था को समझने में आसानी होती है। शिक्षा विभाग में प्रस्तावित बदलाव का वास्तविक प्रभाव अंतिम नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *